शमशेर बहादुर सिंह
एक पीली शाम : शमशेर बहादुर सिंह एक पीली शाम पतझर का जरा अटका हुआ पत्ता शांत मेरी भावनाओं में तुम्हारा मुखकमल कृंश ग्लान हारा-सा ( कि मैं हूं एक मौन दर्पण में तुम्हारे कहीं ?) वासना डूबी शिथिल पल में स्नेह काजल में लिए अद्भुत रूप - कोमलता अब गिरा अब गिरा वह अटका हुआ आंसू सांध्य तारक - सा अतल में | { शमशेर बहादुर सिंह } कविता का सारांश " एक पीली शाम " कविता का कवि शम...




कहा से हो भाई अच्छा कार्य कर रहे हो
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