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कविता की मौत, धर्मवीर भारती

क्लास का विडिओ                                        कविता की मौत / धर्मवीर भारती लादकर ये आज किसका शव चले ? और इस छतनार बरगद के तले , किस अभागन का जनाजा है रुका बैठ इसके पाँयते , गर्दन झुका , कौन कहता है कि कविता मर गई ? XXXXXXXXXXXXXXXXXXX मर गई कविता ? जवानी मर गई ? मर गया सूरज सितारे मर गए , मर गए , सौन्दर्य सारे मर गए ? सृष्टि के प्रारम्भ से चलती हुई प्यार की हर साँस पर पलती हुई आदमीयत की कहानी मर गई ? झूठ है यह  ! आदमी इतना नहीं कमज़ोर है  ! पलक के जल और माथे के पसीने से सींचता आया सदा जो स्वर्ग की भी नींव ये परिस्थितियाँ बना देंगी उसे निर्जीव  ! झूठ है यह  ! फिर उठेगा वह और सूरज की मिलेगी रोशनी सितारों की जगमगाहट मिलेगी  ! कफ़न में लिपटे हुए सौन्दर्य को फिर किरन की नरम आहट मिलेगी  !...